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♦ गौ माता दर्शन ♦
मातरः सर्वभूतानां गावः सर्वसुखप्रदाः

एतद् वै विश्वरुपम् सरर्वेरुपम् गौ पम्. (अ.कांड 9 सु.7 मं.25)
अर्थः (एतत् वै गोरुपं) यह निःसन्दहे गौका रुप है, यही (विश्वरुपं सर्वरुपं) गौका विश्वरुप ओर सर्वरुप है ।। ।।25।।
वशा धौर्वशा पृथिवी वशा विष्णुः प्रजोपतिः । वशापो दुग्धमेपिबन्त्साध्या वसेवश्च ये ।।30।। (अ.कांड 10 सु.10 मं.30)
अर्थः (वशा धौः) वशा धौ हे, (वशा पृथिवी) वशा ही पृथवी है, (वशा प्रजापति विष्णुः) वशा ही प्रजापालक विष्णु है । (ये साध्याः वसवः च) जो साध्य और वसु है, वे - (वशायाः दुग्ध अपिबन्) वशा गौका दूध पीते है ।। ।।30।।
ॐ नमो श्री निष्कलंकी नारायणय जनादॅनाय, भस्मा यूधाय विद् महे दिव्य नैत्राय धिमही, तन्नो ज्वरहर प्रचोदयात-तन्नो ज्वरहर प्रचोदयात ॐ शांतिः शांतिः शांतिः     


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