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♦ अखंड दिव्य ज्योत ♦

    दिव्य ज्योत - सदगुरु श्री ईमामशाह महाराज अपना कार्य पुरा करके वो जब स्वधाम गये तब उनके तेज से ज्योती है जो जलाई नही गयी पर अपने तेज से चालु है. इसको दिव्य ज्योत कहते है. दुनीया मे सब अखंड ज्योत तो है. पर दिव्य ज्योत जो है तो वो पीराणामे ही है. ओर यह दिव्य ज्योत के अंदर ब्रम्हा की जो शक्ति है. तत्व है इस जयोती के अंदर ही है. और यहा पर सब धार्मिक श्रध्धाळु आते है. और ज्योत की अंदर दर्शन करके अपनी मनकी इछाओ धारणाओ यहा रजु करेते है. और उनके मनकी धारणाओ इछाओ पुर्ण होती है. सदगुरु श्री ईमामशाह महाराज ज्योती के स्वरुपे मे यहा बीराजमान है.

    600 साल से जलती यह अंखड दिव्य ज्योत के लीये घी(तुप) पहले से मोगल साम्राजय से ब्रिटीश सरकार से आजादी के बाद कोईभी सरकार की तीजोरी से देते है.

ॐ नमो श्री निष्कलंकी नारायणय जनादॅनाय, भस्मा यूधाय विद् महे दिव्य नैत्राय धिमही, तन्नो ज्वरहर प्रचोदयात-तन्नो ज्वरहर प्रचोदयात ॐ शांतिः शांतिः शांतिः     


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