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♦ प्राथमिक माहिती ♦

सतपंथ धर्म क्या है.

सर्वधर्म का मूल सत्य पर आधारीत है.यह अदि्तीय सत्य है. जीस तरह एक छोटा बीज बडे वृक्ष का आधार है, उसी तरह सुक्ष्म महान सत्य(आत्मा) को पहचाननेके मार्ग को सूफी संत इमामशाह महाराज ने "सतपंथ" दिया है.

ॐ(ओम) प्रणव ब्रम्ह स्मरण करने के साथ ज्योति स्वरुप परब्रम्ह का ध्यान करनेका सतपंथ धर्म मे बताया है.

सूफी संत इमामशाह महाराजने मानव जीवनका अंतीम ध्येय मोक्ष प्राप्ति बताया है. मोक्षकी व्याख्या सूफी संतने भक्तोको मात्र सोला सरल शब्दो मे "कल्कितारक मंत्र" नीचे दी है.

"ॐ श्री निष्कलंकी नारायणाय नमः"

उपरोक्त मंत्र का जाप और चिंतन करने से जीवात्मा को संसार की मोहमाया से छुटकारा मिलके परब्रम्ह की प्राप्ति होती है.

सूफी संत इमामशाह महाराज ने "मूलबंध ग्रंथ" मे तत्व दर्शनकी रचना की है. जिसमे मनचिंतामणी, मनचितवरणी, योगवानी, गुरुवानी, आगमवानी, अम्रतवानी, शिक्षापत्री, कुंभकलश, वारीयझ का तत्वझान और आत्मझान का समावेश कीया है. सूफी संत इमामशाह महाराजने वारीयझमे नव अवतारो को वंदन और दशवे अवतार श्री निष्कलंकी नारायण भगवान की पूजा करनेका आदेश दिया है. जिसमे पांच देव ब्रम्हा, विष्णु, महेश, शक्तिमाता और आदि नारायण की पुजा की जाती है. सूफी संत इमामशाह महाराजने शिक्षापत्रीमे सौ क्रियाओ का पालन करने का बताया है. जिसमे भूखेको अन्न, तरस्ये को पानी, वस्त्रहीन को वस्त्र देना, नीले वृक्ष को न काटना, पशु को न बेचना, परगमन न करना, जीवमात्र पर दया रखना, अवगुन करनेवाले पर दया करना, क्षमा मांगना और क्षमा करना ईत्यादी.........

सूफी संत इमामशाह महाराजने अपने कर्मकाल पूर्ण करके अंतिम समय अपने पांच खास शिष्योको बुलाये जिसमे

(1) हाजरबेग महाराज (पीराणा)
(2) नायाकाका महाराज (कुकस)
(3) भाभाराम महाराज (देवागाम)
(4) साध्वी कीकीबाई (ऋणगाम)
(5) शाणाकाका (पीराणा)

इन शिष्यो को आदेश दिया की आप सभी ज्योतिपात्रमे ज्योत रखे, जिसे खुद सूफी संत इमामशाह महाराज ने अपनी योग शक्ति से प्रज्वलित की है. वह "अखंड दिव्य ज्योत" के नामसे जानी जाती है. सूफी संत इमामशाह महाराज अपनी सारी दिव्य शक्तिया ज्योति स्वरुपमे प्रज्वलित करके समाधिष्ठ हुए. इस अखंड ज्योत के दर्शन करके श्रध्धालु धन्य बन रहे है और इस अखंड ज्योत के सामने ध्यान धरके परब्रम्हमे लीन होते है. वहां बेङी पहेननेकी मान्यता चली आ रही है. जिसकी मनोकामना पूर्ण होनेवाली है, ऊसकी बेङी अपने आप दो कदम चलतेही खुल जाती है. सूफी संत इमामशाह महाराजने वचन दिया है की, सफेद धजा, निष्कलंकी नारायण भगवान का सिंहासन, चांदीकी पादुका, कुंभकलश वारीयझ, अखंड ज्योत अनंतकाल तक रहेंगे.

सूफी संत इमामशाह महाराजने चार वेद की गायत्री और पांचवी मोक्ष मार्गकी गायत्री का उपदेश दिया है. जो नीचे मुजब है.

(1)ऋगवेद
(2)यर्जुवेद
(3)सामवेद
(4)अर्थववेद

ॐ नमो श्री निष्कलंकी नारायणय जनादॅनाय, भस्मा यूधाय विद् महे दिव्य नैत्राय धिमही, तन्नो ज्वरहर प्रचोदयात-तन्नो ज्वरहर प्रचोदयात ॐ शांतिः शांतिः शांतिः     


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