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♦ तीर्थधाम-फैजपुर ♦

श्री सतपंथ आश्रम

प्रेरणा पीठ पिराना सत्पंथियोंका मुख्य पवित्र धाम है | भावनगर, कादिया, कुकस, रुण, देवा, नखत्राना, अवाखल, सूरत, वडाली आदि गुजरात के गावगावमें सत्पंथ मंदिर निर्माण हुए | सतगुरु इमाम शाह महाराजजी ने कच्छ, भुज, गुजरात, मध्य प्रदेश, सौराष्ट्र में अनेको गाव में ज्योति मंदिरी का निर्माण किया | इसी तरह महाराष्ट्र के जलगाँव जिलेमें यावल तहसील में याने पूर्व खानदेश में फैजपुर नगरमें श्री सत्पंथ मंदिर का निर्माण चारसौ साल पहले हुआ | लगभग देडसौ साल पहले मंदिर के धर्मंध्वजपर आकाश मार्ग से दिव्य सुगंधी फुलोकी वृष्टि हुई | आज भी लोग उसकी चर्चा करते है |

सत्पंथ सनातन धर्मं में प्रेरणा पीठ पिराना के अतिरिक्त १) नायाकाका (कुकस) २) संत भाभाराम (देवा) ३) साध्वी किकीबाई (रुण) व सत्पंथ मंदिर फैजपुर को धर्मपीठ के तौर पर मान्यता है | इस फैजपुर धर्मोपीठ के प्रथम आचार्य के रूपमें आचार्य श्री धर्मदासजी महाराज का श्री सोमजीकाका की उपस्थितिमें सर्व संमतीसे चयन हुआ | अपने पाच वर्ष के कार्यकाल में पू. आचार्य धर्मदासजी महाराज ने इस संस्थान के इतिहास की नींव रखी जो आज धर्मंक्षेत्र में उत्कर्ष की चरम सीमापर है | पू. आचार्य धर्मदासजी महाराज से लेकर विद्यमान गादीपति प .पू. आचार्य श्री जनार्दन महाराज तक अखंड बाल ब्रम्हचारी की स्वर्णिम परंपरा चली आ रही है | सत्पंथ में श्रद्धा रखनेवाले आचार शुद्ध दंपतिद्वारा धर्मं कार्य हेतु मंदिर में दिए गये किसी बालक का चयन-शाश्रशुद्ध अध्ययन के पश्चात् - विद्यमान आचार्य द्वारा भावी आचार्य के रूप में किया जाता है | इस प्रकारकी गुरु शिष्य परंपरा के चलते ही इस पीठ का सत्पंथ समाज में विशिष्ट स्थान है | इस मंदिर की इस स्वर्णिम परंपरा को अपनी जीवन-ज्योति से प्रकाशित करने वाले पूर्वाचार्य इस प्रकार है -

१) आचार्य श्री धर्मदासजी महाराज (इ.स. १५४० से १६०५) २) आचार्य श्री प्रेमानान्दजी महाराज (इ.स. १५७० से १६३२) ३) आचार्य श्री भगतरामजी महाराज (इ. स. १६१० से १६७८) ४) आचार्य श्री पंडितजी महाराज (इ.स. १६२५ से १७१२) ५) आचार्य श्री अमृतजी महाराज (इ.स. १७०२ से १७७२) ६) आचार्य श्री दगडूजी महाराज (इ.स. १७५५ से १८३१) ७) आचार्य श्री झेंडूजी महाराज (इ.स.१७७५ से १८६०) ८) आचार्य श्री बारसूजी महाराज (इ.स. १८३० से १९०१) ९) आचार्य श्री धर्माजी महाराज (इ.स. १९०० से १९३९) १०) आचार्य श्री पुरुषोत्तमजी महाराज (इ.स. १९३० से १९८२) ११) आचार्य श्री जगन्नाथजी महाराज (इ.स. १९४२ से २००१) १२) विद्यमान आचार्य श्री जनार्दनजी महाराज

यह फैजपुर आश्रम आजभी सत्पंथीयोका एक पवित्र प्रेरक स्थान बना रहा है | चैत्र शुद्ध प्रतिपदा गुडीपाडवा इस प्रथम वर्ष शुभ दिन पर अनेक शुभकार्य संपन्न होते है | श्रीराम नवमी, अक्षय तृतिया, गुरु पौर्णिमा, जन्माष्टमी, बैल पोला, श्राद्धपक्ष, दुर्गोत्सव कार्तिकी-आषाढ़ी एकादशी इन दिनोपर उत्सव मनाये जाते है | भजन, पूजन, कीर्तन किये जाते है |

संतकृपा आश्रम

मुक्य मंदिर के ठीक सामने 'संतकृपा आश्रम' का निर्माण आचार्य श्री जगन्नाथजी महाराज ने करवाया है | इस इमारत के गर्भागार में सत्पंथ प्रवर्तक सदगुरु श्री इमामशाह महाराजजी की संगेमरमर में बनी प्रसन्न मूर्ति की प्रतिष्ठा की गयी है | जो संपूर्ण भारत वर्ष में स्थापित की गयी इमामशाह महाराज की प्रथम मूर्ति है | यह क्रांतिकारी निर्णय आचार्य श्री जगन्नाथ महारज का था | मूर्ति की प्रतिष्ठा धर्मपीठ कुकस के आचार्य पू.सवगुणदासजी महारज के करकमलोद्वारा की गयी | इस गर्भागार में धर्मपीठ फैजपुर के पूर्वाचार्योकी जगन्नाथ महाराजजी द्वारा चित्रित मनलुभावन प्रतिमाओंका हमें दर्शन होता है | गर्भागार के ऊपर भक्त निवास हेतु कक्ष बनाये गये है | इसी इमारत में ४० फुट ऊँचा टावर है जिसमें खंभात (गुजरात) से लायी हुई विशाल घडी है | आश्रम में प.पू. आचार्य श्री जगन्नाथ महाराज, जो स्वयं एक चित्रकार थे, स्वहस्ते निर्मित चित्र एवं शब्द स्वरुप प्रदर्शनी है | जिनकी भक्तगण आजभी सराहना करते है और चित्र-शब्द रूपमें ज्ञान प्राप्त करते है |

धर्मशाला (भक्त निवास)

मंदिर के ठीक पीछे धर्मशाला (भक्त निवास) की तीन मंजिला इमारत है | जिसमें सभी सुविधाओंसे युक्त १२ कक्ष और एक विशालहॉल है जिसमें लगभग २५० भक्तो की निवास व्यवस्था हो सकती है | इस इमारत के निर्माण में सभी सदभक्तो का योगदान है |

संस्था की अपनी थोड़ी खेत जमींन भी है | शहर से ३ की.मी. की दूरीपर इस खेत में आचार्य बरसू महाराज, आचार्य धर्मा महाराज और आचार्य पुरुषोत्तम महाराज की चरण पादुका स्थापन की गयी है | यहिपर आचार्य जगन्नाथ महाराज का भुमिदाग हुआ है और उनकी सुन्दर मूर्ति की प्रतिष्ट की गयी है | इस वास्तु को हम "पूर्वाचार्य स्मृति मंदिर" भी कह सकते है |

ॐ नमो श्री निष्कलंकी नारायणय जनादॅनाय, भस्मा यूधाय विद् महे दिव्य नैत्राय धिमही, तन्नो ज्वरहर प्रचोदयात-तन्नो ज्वरहर प्रचोदयात ॐ शांतिः शांतिः शांतिः     


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