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♦ श्री विष्णु भगवानना दस अवतार ♦
श्री विष्णु भगवानना दस अवतारनुं कारण अने कार्यनी टुंकमां प्रस्तावना छे.

      एक समये अमरीष राजाए ब्रह्या, विष्णु, महेश्वर तथा आदी नारायण भगवान पासे जइ पूछयुं के - हे प्रभु हुं शुं करु तो लाख चोर्यासीमांथी मुक्ति मळे. त्यारे देवोए अमरीषराजाने कह्युं के तुं यज्ञ कर, ते यज्ञ मां सर्वे देव देवता ओ आवशे अने तने आशीर्वाद आपशे. तो तु मोक्ष पामीश. आ प्रकारथी अमरीश राजाए यज्ञनुं आयोजन कर्यु. अने सर्व देव देवाओ, बार आदित्य, आठ वसु, अश्विनीकुमार, अगीयार रुद्र तथा सर्वे पृथ्वी पाताल देवताओ यज्ञमां आव्या. ब्रह्या, विष्णु, महेश पण आव्या अने सर्वे देवताओए यज्ञ थी आनंद पामीने आशीवार्द आप्यो के हे राजन, हे भक्त, ते जे कारणे आ तपस्या करी अने यज्ञनुं आयोजन कर्यु तेनाथी अमो सर्व देवो संतुष्ट थया छीए तने अमारु वचन छे. के जा तुं अमर थइ गयो. आवुं वरदान देवो पासेथी भक्त अमरीषे प्राप्त कर्यु.
      जयारे शंखासुर यज्ञमा मोडो आव्यो अने तेने जोयु के सर्वे देव देवताओए अमरीषने अमर थवाना आशीर्वाद आपीने पोत-पोताना स्थाने जइ रह्या छे. आ जोइने तेने खुब ज क्रोध आव्यो. अने क्रोध मां ने क्रोधमां तेनाथी बोली जवायुं के हे अमरीष, तने सो जन्म लेवा पडशे. कारण के ते मारु अपमान कर्यु छे. मारा वगर आ यज्ञ पूर्ण थइ शकतो नथी. एटले तने सो जन्म लेवा पडशे. सर्वे देव देवताओ विचारमां पडी गया. हवे शुं करवुं. विण्णु भगवने आमांथी मार्ग काढयो अने शंखासुरने समजाव्यो. के अमो सर्वे देवोए भकतने अमर कर्यो छे ते अमर ज रहेशे. तुं सो जनमनो श्राप छोडी दे. त्यारे वीस जन्म विष्णु भगवानना स्नमान माटे ओछा कर्या. एंसी जन्म तो तेमने भोगववा ज पडशे. पछी विष्णु भगवान ब्रह्याजी पासे गया. ब्रह्याजीए शंखासुरने समजाव्यो. तो तेमना सन्मान माटे वीस जन्म ओछा कर्या. पछी त्रीजावार महेश भगवानना समजाववाथी वीस जन्म ओछा कर्या हवे एंसी जन्म ओछा थया अने फक्त वीस जन्म बाकी रह्या. तो आ वीस जन्म नुं शुं करवुं आखरे सर्वे देवताओ आदी नारायण भगवाननी पासे गया.
      बधा देवोए विनंती करतां करतां कह्युं के अमरिष भकतने, अमर राखवो ज पडशे. अमे तेमने अमर होवानुं वरदान आप्यु छे. परंतु अमारु कह्युं शंखासुर मानतो नथी तो आप एने समजावो. भगवान दिनारायणे शंखासुर ने समजाव्यो के ब्रह्या, विष्णु, महेश अने आधशक्तिना मान खातर ते वीस वीस जन्म मुक्त कर्या. तो मारा मान खातर बाकी रहेला वीस जन्म मुक्त कर.
      त्यारे शंखवो आदिनारायण भगवानने कहे छे केः वीस जन्म बाकी रहेला छे ते माफ नही थाय, आ बाकी रहेला वीस जन्म तो अमरीषभक्तने लेवा ज पडशे. मारु वचन मिथ्या नही थाय.
      त्यारे आदि नारायण भगवा कहे छे के बाकी रहेला वीस जन्म अमरिष भक्त नही ले, कारण के यज्ञ करवामां अमरिष भकतनो कोइ ज अपराध नहोतो, माटे तने कहुं छुं के बाकी रहेला वीस जन्ममांथी दस जन्म तुं ले अने दस जन्म हुं लउ छुं. अमरिष भकतने अमर करी दीधो छे ते अमर थइ गयो ते एक पण जन्म नही ले. आम दस जन्म शंखासुरना छे अने दस जन्म भगवान पोते धारण कर्या छे. आदि नारायणे पोतानी शक्ति विष्णु भगवानने आपी. अने समजाव्युं के मारा नव जन्म तमो धारण करो अने आखरी जन्म जे छे ते जन्म नारायणनो ज थशे. एटला माटे श्री निष्कलंकी नारायण आ नाम नारायण साथे जोडायेलुं छे.

श्री विष्णु भगवान अने शंखासुर ना दस दस अवतार
अ.नं. विगत पहेला कर्तायुगमां बीजा त्रेतायुगमां त्रीजा द्वापरयुगमां चोथा कळीयुगमां
1 श्री विष्णु भगवानना
दस अवतार
चार
श्री मच्छ,
श्री कूर्म,
श्री व्याराह,
श्री नरसिंह
त्रण
श्री वामन,
श्री परशुराम,
श्रीराम
बे
श्री कुषण,
श्री बुद्ध
एक
श्री निष्कलंकी
2 दैत्य शंखासुरना
दस अवतार
चार
दैत्य शंखासुर,
मधुकैटभ,
दैत्य मोरध्वज,
दैत्य हिरण्यकश्यप
त्रण
दैत्य बलीराजा,
दैत्य सहस्त्रार्जुन,
दैत्य रावण
बे
दैत्य कंस,
दैत्य दुर्योधन
एक
दैत्य कालिंगो

      पहेलां कर्तांयुगमां दैत्य शंखासुर, मधुकैटभ, दैत्य मोरध्वज, दैत्य हिरण्यकश्यप अने बीजा त्रेतायुगमां दैत्य बलीराजा, दैत्य सहस्त्रार्जुन, दैत्य रावण पछी त्रीजा द्वापरयुगमां दैत्य कंस, दैत्य दुर्योधन थया अने हवे आज कलियुगमां दैत्य कालिंगनो अवतार थवानो छे. तेवी ज रीते भगवाने पण पोताना प्रथम कर्तायुगमां श्री मच्छ, श्री कूर्म, श्री व्याराह अने श्री नरसिंह अवतार धारण कर्या. बीजा त्रेतायुगमां श्री वामन, श्री परशुराम, श्रीराम अवतार धारण कर्या पछी त्रीजा द्वापरयुगमां श्री कुषण, श्री बुद्ध अवतार धारण कर्या अने आ कलियुगमां हवे श्री निष्कलंकी नारायण के जे आदी नारायण भगवाननो ज अवतार छे. एटले तेओ नारायण रुपे प्रगट थशे.
      आ दस अवतारना स्वरुप सदगुरु श्री इमामशाह महाराजे आपणने बताव्या छे कह्या छे. तेनी विस्तृत माहीती श्रीमद् भगवत दशावतार ग्रंथमां वर्णन करेल छे.


   पहेलो श्री मत्स्य अवतारः
भुतलातल मध्यस्टां, शंखासुरं निहत्य च
उद्वेताः येन वे, वदाः तस्मै मस्त्यात्मने नमः

    जे परमात्माए भूतळ अने अतळनी वचमां रहीने शंखासुर नामना दैत्यनो नाश करीने वेदोनो उध्धार कर्यो हतो, ते मत्स्य रुप अवतारने हुं नमस्कार करु छुं.


  बीजो श्री कुर्म अवतारः
ससागरवनांनि विभ्रत् सप्तद्विपां वसुंधराम्
यो धारयति पृष्ठेन, तस्मै कूर्मात्मने नमः

    जे पोतानी पीठ उपर समुद्वो अने वनो सहित सात द्वीपवाळी पृथ्वीने धारण करे छे. ते कूर्म रुप अवतारने हुं नमस्कार करु छुं.


  त्रीजो श्री वराह अवतारः
महार्णवे निमग्नां वाराहं रुपमास्थितः
य उज्जहार ट्रंष्ट्राभ्यां तस्मै कोडत्मने नमः

    जेमणे वराह रुप लइने एकाकार थएला महासागरमां डूबी गयेली पृथ्वीने बहार काढी हती ते वराह रुप अवतारने हुं नमस्कार करुं छुं.


  चोथो श्री नरसिंह अवतारः
नारिसंहवपुः कृत्या, यस्त्रैलोक्य भयंड्करम्
हिरण्यकशिपु जध्ने तस्मै सिंहात्मने नमः

    जेमणे त्रणे लोकने भय आपनारु एवुं नरसिंहरुप धारण करीने हिरण्यकश्यपनो नाश कर्यो हतो, ते नरसिंह रुप अवतारने हुं नमस्कार करुं छुं.


  पाचमो वामन अवतारः
वामनं रुपमास्याय, बलिं संयम्य मायया
येन क्रान्ताः त्रयो लोकाः तस्मै क्रान्तात्मने नमः

    जेमणे वामन रुप धारण करी माया वडे बली राजाने वश करीने त्रणे लोकने त्रण पगलांथी भरी लीधा हता ते वामन रुप अवतारने हुं नमस्कार करु छुं.


  छठ्ठो परशुराम अवतारः
जमदग्नि सुतो भूत्या रामः परशुधृग्विभुः
सहस्त्रार्जुनहन्ता यः तस्मै उग्रात्मने नमः

    जे परमात्माए जमदग्नि ऋषिना पुत्र परशुराम रुपे हाथमां फरशी धारण करीने सहस्त्रार्जुन दैत्यनो नाश कर्यो हतो, ते उग्र मूर्तिरुप परशुराम रुप अवतारने हुं नमस्कार करु छुं.


  सातमो श्री राम अवतारः
रामो दाशरथिर्भुत्वा पौलस्त्य कुल लांछनम्
जधान रावणं संख्ये तस्मै क्षत्रात्मने नमः

     जेमणे दशरथना पुत्र रामचंद्र रुपे थइने पुलस्त्य कुळमां जन्मेला रावणनो युध्धमां आखा कुळ सहित नाश कर्यो हतो ते क्षत्रिय रुप अवतारने हुं नमस्कार करु छुं.


  आठमो श्री कृष्ण अवतारः
वसुदेवसुतः श्रीमानवासुदेवो जगत्पति
जहार वसुधामारं तस्मै कृष्णात्मने नमः

    जगतपति एवा श्रीमान वासुदेवे, वसुदेवना पुत्र थइ पृथ्वीनो भार उतार्यो, ते श्री परमात्माना कृष्णावतारने हुं नमस्कार करुं छुं.


  नवमो श्री बुध्ध अवतारः
बुद्धरुपं समासाध सर्वरुपं परायणः
मोहयन् सर्वमूतानि तस्मै मोहात्मने नमः

    सर्वरुप परायण एवा जे परमात्माए बुध्धनुं रुप धारण करीने सर्व प्राणीओने मोहित कर्या हता ते भगवान बुध्ध रुप अवतारने हुं नमस्कार करु छुं.


  दसमो श्री निष्कलंकी अवतारः
हनीष्यति कलौ मध्ये म्लेच्छांन्तुर्गवाहनः
धर्म संस्थापनार्थाय तस्मै कल्क्यात्मने नमः

    धर्मनी थयेली ग्लानी पछी, धर्मने पाछो स्थापन करवा माटे कलीयुगने अंते श्वेत घोडा उपर चडीने कालिंगा दैत्य अने अधर्मीओनो नाश करशे ते निष्कलंकी रुप अवतारने हुं नमस्कार करुं छुं.


ॐ नमो श्री निष्कलंकी नारायणय जनादॅनाय, भस्मा यूधाय विद् महे दिव्य नैत्राय धिमही, तन्नो ज्वरहर प्रचोदयात-तन्नो ज्वरहर प्रचोदयात ॐ शांतिः शांतिः शांतिः     


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