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♦ आगमवाणी ♦

श्री निष्कलंकी नारायण अवतार विषे अन्य संत महात्माओनी आगमवाणी


 1. सदगुरु श्री इमामशाह महाराजः-

      श्री सतपंथ धर्ममां सदगुरु श्री इमामशाह महाराजे पूजामां जळ भरवाना मंत्रमां एम कह्युं छे के सदगुरु श्री इमामशाह महाराज अरज करे छे के-

"जांबुद्गिपने कुंवारीका क्षेत्रे, निष्कलंकी नारायण स्वरुपे,
कळशमां आवी कळा धरोने घटमां आवी वास करो."
      सदगुरु श्री इमामशाह महाराजे श्री विष्णु भगवानना दश अवतारनुं वर्णन करेल छे. जेमां नव अवतारने वंदन करी कलियुगना अंते प्रगट थनार श्री निष्कलंकी नारायण भगवाननुं स्मरण, घ्यान, पूजा, प्रार्थना, भक्ति, उपासना करवी एम तेमनी वाणी द्वारा समजाव्यु छे.



 2. संतश्री तुलसीदासजी महाराजः-

      गोस्वामी संतश्री तुलसीदासजी महाराज श्री रामना उपासक हता. तेमणे आगमवाणीमां सदगुरु श्री इमामशाह महाराज नी वाणीने समर्थन आप्यु छे.

|| दोहरो ||
"भवताण भगवंत भज, धारण धर उपर ध्यान,
ए धारण आगम एही, निष्कलंकी एही नाम."
       हे मनुष्य कळीयुगमां भवसागर तरवा माटेनो एक ज रस्तो छे. तारा उरमां अंतरमा "श्री निष्कलंकी" नाम स्मरण कर. एना नामनी भक्ति कर, तो चोर्यासीना फेरामांथी जरुर मुक्ति मळशे. एवु हुं आगम देखुं छुं एम संत तुलसीदास कहे छे.



 3. भक्त नरसिंह महेताः-

       श्री कृष्ण भगवानना परम भक्त नरसिंह महेताए पण सदगुरु श्री इमामशाह महाराज नी वाणी ने समर्थन आप्युं छे.

"घोडले चडीने निष्कलंकी आवशे, आवे मारो युगो युगनो स्वामी
कलियुग उथापी सतयुग थापसे, महेता नरसिंहना स्वामी."
       कळीयुग अंते भगवान निष्कलंकी नारायण घोडा उपर स्वार थइने आवशे. कलियुगनुं उथापन करी सतयुगनुं स्थापन करशे. असुरोनो संहार करी भक्तोनो उध्धार करशे. एवुं नरसिंह महेता ए उपरनी एक भजननी पंक्तिमां कह्युं छे. तेज वात सदगुरु श्री इमामशाह महाराजे सतपंथी भक्तोने कही छे.



 4. वेदम व्यास मुनिः-

      द्वापर युगना सदगोर श्री वेदम व्यास मुनिए भागवतना श्र्लोकमां तेनुं वर्णन करेल छे अने सदगुरु श्री इमामशाह महाराज नी वाणी ने समर्थन आप्यु छे.

|| श्र्लोक ||
"हनिष्यति कलेरंते, म्लेच्छां स्तुरंगवाहनः
धर्म संस्थापनार्थाय तस्मै कल्कायात्मने नमः"
      धर्मनी थयेली हानी पछी, तेना पुनः स्थापनने माटे कलियुगने अंते, अश्वारुढ थइने, जे आसुरी तत्वोनो नाश करशे ते निष्कलंकी अवतार ने हुं नमस्कार करु छुं. जे असुरोनो संहार करी भक्तोनो उध्धार करशे.



 5. देवायत पंडितः-

   गुरु शोभाजी महाराजे करेल आगमवाणीनुं ज्ञान देवायत पंडिते सति देवलदेने समजाव्युं छे.जेमां कह्युं छे के-

"यति सति ने साबरमती, त्यां होसे शुराना संग्राम,
दैत्य कालिंगाने मारशे, धरसे निष्कलंकी नाम."
      जे वात आ देवायत पंडिते आगमवाणीना भजनमां कही छे. तेज वात सदगुरु श्री इमामशाह महाराजे गायत्री मंत्र पांचमामां बतावेल छे के - द्वीपे, सद्वीपे, जांबुद्विपे, कोटांग कोंटांग, जीवनंग परम मुक्तिमः मिंघः ओत्रंग देशंग, कुमारीका क्षेत्रंग, मुक्त गंग, सत्य मुखंग, वभुत नगर, वैराट वामे, भवेतंग, महा सर्सतिसाभ्रमति, पूर्व त्रष्टे, नव स्थळे, गुर्मटे, रेवा ओत्रंग, षोडश जोजनंग, पंचनदी मूळ स्थाने, एटले के नर्मदा नदीथी सोळ जोजन एटले चोसठ गाउ पीराणा मुकामे साबरमती किनारे, आ सरनामा प्रमाणे कलियुगने अंते निष्कलंकी भगवान आवशे ने दैत्य कालिंगाने संहारीने, भक्तोनो उध्धार करी, कलियुगनुं उथापन करी सतयुगनुं स्थापन करशे. एवी आगमवाणीमां सदगुरु श्री इमामशाह महाराजे कह्युं छे. अने ते ज प्रमाणे देवायत पंडिते पण भजनमां आ ज स्थळ बतावेल छे के दैत्य कालिंगाने संहारवा माटे निष्कलंकी भगवाननुं प्रागटय थशे. कलियुगनुं उथापन करी सतयुगनुं स्थापन करशे एम देवायत पंडित कहे छे.



 6. श्री रामदेव पीर महाराजः-

      विष्णु नारायणना अंशावतार श्री रामदेव पीर महाराजे एमनी आगमवाणीमां सदगुरु श्री इमामशाह महाराजनी वाणीने समर्थन आप्यु छे.

"कुंवारीकामां मांडवो रचीयो, निष्कलंकीने परणाववा,
पांच, सात, नव आगळ मोकल्या, मांडवडो शणगारवा."
      तो ए ज वात सदगुरु श्री इमामशाह महाराजे करी छे के भगवान निष्कलंकी नारायण कलियुगने अंते प्रगट थशे. भगवान विष्णु आदी नारायणनी कळा लइने पाताळमां दैत्य शंखासुर पासे वेद लेवा गया त्यारे विष्णु भगवाने धरती माता ने वचन आप्यु छे के कलियुग ना अंते जांबुद्विपे कुंवारीका क्षेत्र भूमि उपर दसमो अवतार निष्कलंकी नारायण धारण करीश. त्यारे तमोने वरीश. आ वचन मुजब भगवान कुंवारीका भूमीने परणशे तेवुं पाताळमां वचन आपेलुं छे. तेम सदगुरु श्री इमामशाह महाराजे तेमनी वाणीमां वर्णन करेल छे. अने तेज वातनुं वर्णन अही रामदेवपीर महाराजे कहेल छे. के कुंवारीकामां मांडवो रचाशे, निष्कलंकीने परणाववा, पांच, सात, नव आगळ मोकल्या, मांडवडो शणगारवा. पांच एटले पांच करोडी प्रहलाद, सात करोडी हरिश्र्चंद्र, नव करोडी युधिष्ठिर अने बार करोडी कमळा कुंवर आगळ तैयारी करवा आवशे. एम रामदेवपीर महाराजे आगम कह्यां छे.

♦ आगमवाणी ♦

आ किळयुगमां अधर्म शी रीते फेलाशे ते संबधनुं वर्णन नीचे मुजब कर्यु छे.पाप,कलह,हिंसा ,विश्वासघात, वगेरे बधा अनर्थो दुनियामां चोमेर फेलाशे.ब्राह्मणक्षत्रीय वैश्य शूद्र ए चार वर्णोमां एकाकार थशे अने लोको दु:खी थशे.पोताना कुळना आचारो छोडी आचारभ्रष्ट अने शीलभ्रष्ट थशे.मनुष्यनी मानवता,शुद्ध आचारिवचार वगेरे नष्ट थशे अने लोको क्रियाभ्र्सट थशे.कर्मकांडी कहेवडावनारा लोको धर्माचरण छोडी धर्मनी अने भकतोनी निंदा अवगणना करशे.जुदी जुदी जातोमां एकंकार थशे विवाह विगेरेना मंगलिविधमां भंगाण पडशे अने ते नाश पामशे.सती,पितव्रता,कुळवान अने शीलवान स्त्रियोक्रीया भ्रष्ट अने शीलभ्रष्ट थशे.राजाओ प्रजाने रंजाडशे.प्रजा पण तेवी ज थशे.यित साधु विगेरे पण पोताना कर्मो छोडी अधर्मी,कामी अने क्रोधी थशे.पिताकन्या, माता-पुत्र अथवा कन्यानो आचार सासु-ससरा साथे जमाईनो आचार ए बधुं विपरीतपणे थशे अने दुनियामां सर्वत्र पापाचरण थशे.आवा पापाचरणथी वातावरणमां फेरफार थई काळच्रक बदलाशे एटले अकाळे वर्षा थशे.अगर दुकाळ पडशे, अनाज ओछुं पाकशे.वृक्षने सारा फळो आवशे नहीं,ते फळफुल विहोणा थशे.अनाज अने फळमाना रसकस निकळी जशे,अने सत्व वगरनुं अनाज खावा मळशे,तेथी लोको मांसाहारी,व्यसनी,दुष्ट,अन्यायी,निर्बळ निस्तेज अने क्रोधी बनशे.अनाचार वधशे,तीर्थस्थळोनुं महत्व घटशे,रिद्धी सिद्धी वगेरे थंभी जशे.समुद्र,नदी,तळावना पाणी सुकाई जशे.सूर्यनी उष्णता वधशे,मोटा मोटा गामो उजजड थशे,धरतीकंप थशे,आगो लागशे,चेपीरोगो फाटी नीकळशे.आ रीते काळचक्रमां फेरफार थशे.एमा पण भारत देशना उतरे आवेल चीन देशमा कालिंगा नामनो राक्षस अवतरशे.तपश्चर्याना जोरे ते रावण जेवो प्रबळ प्रमत क्रूर ढोंगी अने बेईमान थशे.एमना पोतान हाथ नीचेना मुख्य मुख्य शिष्योने ते देश विदेश मोकली पोतानुं महत्व वर्णवानुं कहेशे.ए शिष्यो अनेक खटपटो करी,चमत्कार करी बतावशे.लोकोने ते कहेशे के अमो तीर्थवासी छीए बधा तीर्थोना मिहमा अमारी पासे छे.पाणी मंतरी तेनुं घी करी बतावशे.लाकडाना घोडाने घांस चखाडशे.कालींगों दैत्य पोते अत्रंगी आसन उपर बेसशे.सात पेढीना मा बाप देखाडशे.लोकोनी मनोकामनाओ पूरी करशे,नदीमां केनालो खोदी पाणी वहेवडावशे.नदीना पात्र पलटावशे.दानवोने देव गणशे.अत्याचारी बनी सजजनोनुं पािवत्र्य बगाडशे. आ रीते लोकोने पोतानी मायाजाळमां फसावी पोतानी सता प्रस्थापित करशे. साचा भकतो माटे आ कसोटीरूप छे. पोतानुं ईमान कायम राखी जे द्रीढ निश्चयथी परमेश्वरनुं निष्कलंकी नारायणनुं भजन शरू करशे,नामस्मरण छोडशे नही तेज राक्षसोथी अलिप्त रहेशे अने साचो भकत कहेवडावशे आवा भकतोने दुष्ट लोको पजव्या वगर रहेशे नही वगेरे आगमज्ञान सदगुरु ईमामशाहे वर्णव्युं छे.पृथ्वी उपर पापनो भार वधशे ते उतारवा माटे के हलको करवा माटे ईश्वरने अवतार लेवो पडशे.पंचनदी मूळस्थान उपर देव दानवनी एटले निष्कलंक नारायण अने कालींगा राक्षस वच्चे लडाई थई ईश्वर दानवने मारी नांखी पृथ्वी उपरनो पापनो भार दूर करशे अने चीन देशनो जलप्रलय थवा माटे समुद्रमां डुबाडशे. आगमवाणीनामना ग्रंथमां सदगुरु ए आ प्रमाणे जणाव्यु छे.आ उपरथी आपणने तेमना अगाध आगम ज्ञाननो ख्याल आवी शकशे.आ सतपंथ युगेयुगथी चालतो आवेलो छे ते आज कालनो नथी पण अनादि कालथी चालतो आव्यो छे.सनातन छे अने तेज सत्मार्ग सदगुरु ए आपणने बताव्यो छे.ईमामशाहे बतावेला सत्पंथमां मोटे भागे सत्यनो ज समावेश छे.परब्रह्मना आ सत्यस्वरूपने ज ईमामशाहे सत् नाम आप्युं छे. आ सत्ने ओळखवानो जे मार्ग तेज सत्पंथ छे.

ॐ नमो श्री निष्कलंकी नारायणय जनादॅनाय, भस्मा यूधाय विद् महे दिव्य नैत्राय धिमही, तन्नो ज्वरहर प्रचोदयात-तन्नो ज्वरहर प्रचोदयात ॐ शांतिः शांतिः शांतिः     


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